क्यो बेजुबन पर सियासत है गरम

क्यो बेजुबन पर सियासत है गरम
तुम इंसान भी हो ऐ बेशरम
इस फसाद की आंधी तेरे घर पे आएगी
अपने किये पे तब तुझे तब शर्म आएगी
सियासी मतलब में तुम समाज क्यो बाटतेे हो
बेदर्दों के महफ़िल में बे ज़ुबान क्यो काटते हो
अपने हस्ती के दुश्मन लोग आप ही होते है
जो बरसो में मिला उसे नादानी में खोते है
सबक तुमने माज़ी से नही ली है सायद
आने वाली है तेरे मुस्तक़बिल पर अब आफत

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